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कथन एवं पूर्वधारणाएँ Reasoning

पूर्वधारणा से तात्पर्य ऐसे तथ्यों से है जो पूर्णत: स्पष्ट रूप से नहीं कही जाती, फिर भी श्रोता। इसका आशय समझ लेते हैं, अर्थात् अप्रत्यक्ष रूप से अनुमानित वह अवधारणा जो किसी कथन में छिपे हुए यथार्थ को निरूपित करती है, पूर्वधारणा कहलाती है।



उदाहरणस्वरूप यदि किसी अधिकारी द्वारा यह कहा जाता है कि ‘घाटा पूर्ति के लिए करों को बढ़ाया जाए इससे श्रोता द्वारा यह स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकता है कि ‘घाटा हुआ है” जबकि उस अधिकारी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि ‘घाटा हुआ है लेकिन घाटा पूर्ति के लिए करों का बढ़ाया जाना, घाटा होने का स्पष्ट संकेत है। अत: ‘घाटा होना’ श्रोता द्वारा लगाई गई एक पूर्वधारणा है।

इस अध्याय के अन्तर्गत एक कथन दिया गया होता है तथा इसके बाद दो या तीन पूर्वधारणाएँ दी गई होती हैं, आपको दिए गए कथन पर विचार करते हुए यह ज्ञात करना होता है कि दी गई पूर्वधारणाओं में कौन-सी पूर्वधारणा दिए गए कथन में छिपी हुई है। परन्तु कभी-कभी पहले एक पूर्वधारणा दे दी जाती है फिर नीचे तीन या चार कथन दिए जाते हैं, आपको दी गई पूर्वधारणा पर विचार करते हुए यह ज्ञात करना होता है कि दिए गए कथनों में कौन – कौन से कथनों के लिए यह पूर्वधारणा उपयुक्त है

पूर्वधारणा मानी गई या गृहित या अप्रत्यक्ष रूप से परिकल्पित अवधारणा जो किसी कथन में अन्तर्निहित यथार्थ को सम्बोधित करती है उसे परिकल्पना या पूर्वधारणा कहते हैं।

कल्पना वह है जो मानी गई या ग्रहित या अप्रत्यक्ष रूप से कही गई हो। जब हम तर्क दे रहे होते हैं, तो बहुत सारी बातों को कहे बिना ही छोड़ देते हैं, जो सारी बातें श्रोता को पता रहती हैं। अत: परिकल्पना वह है जो स्वीकार कर लिए जाते हैं। Implication and Assumption में थोड़ा अन्तर है। Implication का अर्थ छुपा हुआ होता है जबकि Assumption का अर्थ परिकल्पना करना। जैसे ‘शाहरूख खान की आने वाली फिल्म हिट होगी, इसका आशय यह है कि अभी तक शाहरूख खान की जितनी भी फिल्में आई, सभी हिट थीं। इसलिए आगे आने वाली फिल्में भी हिट होंगी।
इस अध्याय से सम्बन्धित प्रश्नों को हल करने से पूर्व नीचे दिए गए प्रमुख तथ्यों पर ध्यान रखना आवश्यक है

(i) कोई भी पूर्वधारणा कथन के आधार पर निकाला गया निष्कर्ष है, तो वह मान्य नहीं होगी।

(ii) किसी भी पूर्वधारणा में कथन का यथार्थ भाव छिपा होना चाहिए।

(iii) यदि किसी पूर्वधारणा में कथन की पुनरावृत्ति हुई है, तो वह मान्य नहीं होगी।

(iv) कोई भी पूर्वधारणा सुधार, परामर्श, सलाह, लाभदायक प्रभाव व परिणाम को प्रदर्शित करती है, तो ऐसी पूर्वधारणा मान्य होगी।

(v) किसी भी पूर्वधारणा में कथन से बाहर की बात नहीं होनी चाहिए अर्थात् पूर्वधारणा का निहितार्थ कथन के निहितार्थ के विपरीत नहीं होना चाहिए।

(vi) पूर्वधारणा और कथन के बीच कारण पूर्ण-रूपेण व्याप्त होने चाहिए अर्थात् कुछ शब्द जैसे-प्रत्येक, सभी, क्या, क्यों, इसलिए आदि प्रश्नवाचक शब्द अथवा उत्तरसूचक शब्द पूर्वधारणा वाले वाक्य से जुड़े हों, तो वे मान्य नहीं होंगे।

(vii) पूर्वधारणा तथा कथन एक-दूसरे के लिए सार्थक होने चाहिए।

(viii) यदि कोई पूर्वधारणा कथन से अधिक व्यापक है, तो वह मान्य नहीं होगी।

(ix) एक कथन की एक से अधिक पूर्वधारणाएँ निकाली जा सकती हैं।

(x) कोई भी पूर्वधारणा सामान्य नहीं होनी चाहिए।

(xi) कुछ विशेष शब्द जैसे-सम्भव, सकना, सामान्यत: आदि पूर्वधारणा वाले वाक्य में लगे हों, तो आमतौर पर मान्य होती है।

(xii) यदि किसी पूर्वधारणा में भूत या भविष्य की बात कही गई है, तो वह सामान्यत: मान्य नहीं होती है।

(xiii) सरकारी निर्देशों को सामान्यत: आम जनता द्वारा माने जाने की आशा की जाती है इसलिए पूर्वधारणा के रूप में यह मान्य है।

(xiv) यदि कोई पूर्वधारणा विज्ञापन से सम्बन्धित हो, तो वह मान्य होगी। ”

(xv) यदि कोई पूर्वधारणा जनहित के लिए किए गए अनुरोध पर आधारित हो, तो वह वैध मानी जाएगी।

(xvi) यदि कोई पूर्वधारणा कथन के अन्दर का ही कोई तथ्य हो और वह अनुमानित हो, तो वैध मानी जाएगी।







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