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कैलेण्डर Reasoning Notes

कैलेण्डर दिन, माह एवं वर्ष के बीच आपसी सम्बन्ध प्रदर्शित करने का तरीका है।

प्रत्येक वह वर्ष जो चार से विभाजित हो जाए वह लीप वर्ष होता है तथा अन्य सभी साधारण वर्ष होते हैं। साधारण वर्ष में 365 दिन होते हैं और लीप वर्ष में 366 दिन अर्थात् एक साधारण वर्ष में कुल 52 हफ्ते और 1 दिन होते हैं तथा एक लीप वर्ष में 52 हफ्ते और 2 अतिरिक्त दिन होते हैं।



सामान्य एवं सौर वर्ष

समय मापन की मुख्य तथा सबसे छोटी इकाई दिन है। एक दिन की समयावधि पृथ्वी की अपनी धुरी पर लगाए गए एक सम्पूर्ण चक्कर में व्यतीत किए गए समय के बराबर होती है एवं पृथ्वी जब सूर्य का एक पूर्ण चक्कर लगा लेती है तो इसमें लगा समय एक सौर वर्ष के बराबर होता है।

एक सौर वर्ष = 365 दिन, 5 घण्टा, 48 मिनट तथा 47½ सेकण्ड के बराबर होता है जो लगभग 365.2422 दिन के बराबर होता है। इसे संशोधित कर ‘365 दिन को ही वर्ष मान लिया गया जिसे सामान्य वर्ष कहा गया।

लीप वर्षं

एक सामान्य वर्ष 365 दिन का होता है तथा एक सौर वर्ष 365.2422 दिन का। इस तरह प्रत्येक सामान्य वर्ष, सौर वर्ष से 0.2422 दिन के बराबर छोटा होता है। यदि वर्ष की गणना 365 दिन के आधार पर की जाए, तो प्रत्येक वर्ष साधारण वर्ष, सौर वर्ष से 0.2422 दिन के बराबर छोटा होता चला जाएगा। इस प्रकार कैलेण्डर की महत्ता कम हो जाएगी। यदि यही क्रम 4 वर्ष तक चलता रहे, तो इस समयावधि में सामान्य वर्ष, सौर वर्ष से 0.2422 × 4 दिन यानि ‘0.9688 दिन के बराबर पीछे हो जाएगा। यह अवधि लगभग 1 दिन के बराबर है। इस प्रकार प्रत्येक 4 वर्ष बाद संशोधन स्वरूप जोड़ा जाने वाला यह 1 दिन फरवरी माह में जोड़ा जाता है जिससे फरवरी 29 दिन की हो जाती है तथा वर्ष 366 दिन का। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वह वर्ष जो 4 से पूर्णत: विभाजित होता है अथवा शताब्दी वर्ष जो 400 से पूर्णत: विभाजित हो जाते हैं, लीप वर्ष कहलाते हैं; जैसे-1996, 2000, 2004, 2016 इत्यादि।

लीप वर्ष में वर्ष का पहला दिन एवं अन्तिम दिन दोनों ही असमान होते हैं अर्थात् वर्ष के प्रथम दिन की तुलना में अन्तिम दिन एक दिन बढ़ जाता है; जैसे यदि किसी लीप वर्ष का प्रथम दिन यानि 1 जनवरी बुधवार है, तो उसी वर्ष का अन्तिम दिन यानि 31 दिसम्बर को बृहस्पतिवार होगा।

शताब्दी लीप वर्ष

प्रत्येक 4 वर्ष पर लीप वर्ष आता है। अत: लीप वर्ष 4 के गुणक में निहित होते हैं। इस प्रकार वर्ष की संख्या में यदि 4 से भाग लग जाए, तो वह लीप वर्ष होगा लेकिन यह नियम शताब्दी वर्षों पर लागू नहीं होता है। शताब्दी लीप वर्ष 400 वर्षों पर आते हैं। ये 400 वर्षों के गुणक होते हैं। इस प्रकार यदि शताब्दी वर्ष में 400 का भाग लग जाए, तो वह शताब्दी वर्ष लीप वर्ष होगा।

दिनों का चक्र

किसी भी सप्ताह के सातवें भाग को दिन कहते हैं। एक सप्ताह में 7 दिन होते हैं। सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार तथा रविवार। सात दिनों में सप्ताह का एक चक्र पूरा हो जाता है। इसके बाद दिन पुनः आवर्तित होने लगते हैं। ।

किसी भी माह के 28वें, 30वें या 31वें भाग को या वर्ष के 365वें भाग को तिथि कहते हैं। इसका निर्धारण संख्याओं द्वारा किया जाता है।

विषम दिनों की अवधारणा

दिनों के इस पूर्ण चक्र के बाद बचे अतिरिक्त दिनों को विषम दिन (odd days) कहा जाता है- यदि आरम्भ सोमवार से किया जाए, तो 8 दिनों की समयावधि में 1 पूर्ण चक्र तथा 1 अतिरिक्त दिन अथवा 1 विषम दिन प्राप्त होगा। एक पूर्ण चक्र में सभी दिन एक के बाद एक आते हैं। इसके बाद दिन पुनः आवर्तित होने लगते हैं।

दिनों के सात दिन के पूर्ण चक्र के पश्चात् जो भी दिन बचता है, उसे विषम दिन कहते हैं। अत: विषम दिन ज्ञात करने के लिए दिनों की संख्या में 7 से भाग देते हैं। भाग की इस प्रक्रिया में जो भागफल (या बार) प्राप्त होता है, वह दिनों के पूर्ण चक्रों की तरफ संकेत करता है तथा जो शेष बचता है, वह विषम दिनों की ओर संकेत करता है।

14 दिनों में विषम दिनों की संख्या = 14 = 2 बार 0 शेष

= 0 दिन

20 दिनों में विषम दिनों की संख्या = 20/7 = 2 बार 6 शेष

= 6 दिन

30 दिनों में विषम दिनों की संख्या = 30/7 = 4 बार 2 शेष

= 2 दिन

365 दिनों में विषम दिनों की संख्या = 365/7 = 52 बार 1 शेष

⇒ नोट – विषम दिनों की संख्या 6 से अधिक नहीं हो सकती |

विषम दिनों का प्रयोग

किसी निश्चित तिथि को कौन-सा दिन होगा, यह ज्ञात करने के लिए विषम दिन का प्रयोग आवश्यक है। ईसवी संवत् की शुरूआत सोमवार है अर्थात् 1 जनवरी सन् 1 को सोमवार था। अत: ईसवी संवत् के सम्बन्ध से चलने वाले 7 दिनों के चक्र में प्रथम दिन सोमवार तथा अन्तिम दिन रविवार है।

कैलेण्डर Reasoning

कैलेण्डर सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य

(i) एकः सामान्य वर्ष = 365 दिन = 52 सप्ताह + 1 दिन = 1 विषम दिन

(ii) एक लीप वर्ष = 366 दिन = 52 सप्ताह + 2 दिन =2 विषम दिन

(iii) 100 वर्ष = 76 साधारण वर्ष + 24 लीप वर्ष

= (76 + 24 × 2) विषम दिन

= 124 विषम दिन

= 17 सप्ताह + 5 दिन

= 5 विषम दिन

(iv) 200 वर्षों में विषम दिनों की संख्या 2 × 5/7 = 1 बार 3 शेष = 3 दिन

(v) 300 वर्षों में विषम दिनों की संख्या – 2 बार 1 शेष = 1 दिन

(vi) 400 वर्षों में विषम दिनों की संख्या

4 × 5 = 20 दिन

क्योंकि चौथी शताब्दी लीप वर्ष होती है। अत: विषम दिनों की संख्या में 1 और जोड़ना पड़ेगा :, 400 वर्षों में विषम दिनों की संख्या

20 + 1/7 = 3 बार 0 शेष

= 0 दिन

अत: 400 वर्षों में कोई विषम दिन नहीं होता है।

(vii) 31 दिन वाले महीनों में विषम दिनों की संख्या

=31 = 4 बार 3 शेष

= 3 दिन

(viii) किसी शताब्दी का अन्तिम दिन मंगलवार, बृहस्पतिवार या शनिवार नही हो सकता लेकिन बुधवार, शुक्रवार तथा रविवार हो सकता है।

(ix) किसी शताब्दी का प्रथम दिन सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार या शनिवार हो सकता है।

(x) यदि एक सामान्य वर्ष में किसी माह की किसी तिथि को सोमवार है या कोई भी वार हो, तो अगले सामान्य वर्ष में उसी माह की उसी तिथि को वह वार एक से बढ़ जाएगा|  जैसे – यदि वर्ष 2001 में 1 जनवरी को सोमवार हो, तो वर्ष 2002 में 1 जनवरी को मंगलवार होगा।

(xi) प्रत्येक लीप वर्ष (अधिवर्ष) मे किसी विशिष्ट दिन या तिथि का वार अगले वर्ष 2 से बढ़ जाएगा यानि 1 जनवरी, 1996 को शनिवार हो, तो 1 जनवरी, 1997 को सोमवार होगा।

(xii) सामान्य वर्ष का अन्तिम दिन वही होता है जो उसका पहला दिन होता है यानि यदि 1 जनवरी को बृहस्पतिवार है, तो उस वर्ष का 31 दिसम्बर भी बृहस्पतिवार ही होगा और अगले वर्ष की 1 जनवरी को शुक्रवार होगा। यदि लीप वर्ष की 1 जनवरी बृहस्पतिवार है, तो उस वर्ष 31 दिसम्बर को को शनिवार होगा।

(xiii) 7 पीछे लौटने हेतु दिनों की संख्या = आगे बढ़ने हेतु दिनों की संख्या ।

(xiv) इस अध्याय से सम्बन्धित प्रश्नों में प्रयुक्त शब्द ‘के बाद’ , ‘के पहले’,’से बाद’ एवं ‘से पहले’ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। अत: इसकी जानकारी आवश्यक है।

यदि किसी प्रश्न में तिथि अथवा दिन ज्ञात करने के लिए ‘के बाद’ शब्द प्रयुक्त हुआ हो, तो दिए गए समय से 1 दिन बढ़ाकर अभीष्ट समय ज्ञात करना होता है; जैसे – 15 मार्च के 4 दिन के बाद कौन-सी तिथि होगी, तो यहाँ 15 मार्च के 4 दिन बाद की तिथि का अर्थ है। 15 + 4 + 1 = 20 मार्च इसी प्रकार बृहस्पतिवार के तीन दिन के बाद का दिन पूछे जाने पर बृहस्पतिवार के तीन दिन बाद का दिन अर्थात् चौथा दिन सोमवार होगा। इसके अतिरिक्त यदि किसी प्रश्न में ‘के पहले’, ‘से पहले’ या ‘से बाद’ शब्द प्रयुक्त होता है, तो उतना ही समय घटाना अथवा बढ़ाना होता है जितना समय प्रश्न में दिया हुआ हो, जैसे-बृहस्पतिवार के तीन दिन पहले कौन-सा दिन था, तो यहाँ बृहस्पतिवार के तीन दिन पहले का तात्पर्य, बृहस्पतिवार – 3 अर्थात् सोमवार है। इसी प्रकार 12 अगस्त से 5 दिन बाद कौन-सी तिथि होगी, तो यहाँ इसका तात्पर्य 12 + 5 अर्थात् 17 अगस्त है।

(xv) प्रत्येक सप्ताह में कुल दिनों की संख्या 7 होती है। अत: किसी भी दिन में 7 दिन जोड़ने अथवा घटाने पर पुन: वही दिन प्राप्त होता है।

इस अध्याय में पूछे जाने वाले प्रश्नों को सामान्यत: चार भागों में बांटा गया है

(a) विभिन्न तिथियों पर आधारित प्रश्न

दी गई तिथि के बाद से पूछी गई तिथि तक अथवा दी गई

तिथि के पहले से पूछी गई तिथि तक के दिनों की कुल संख्या /7

ज्ञात करने पर-यदि पूरा-पूरा भाग लगता है तो, पूछी जाने वाली तिथि को वही दिन होगा जो प्रश्न में दी गई तिथि को है।

(b) वर्ष अन्तराल पर आधारित प्रश्न

इसके अन्तर्गत पूछे जाने वाले । प्रश्नों में सर्वप्रथम दिए गए दोनों वर्षों के बीच का अन्तर ज्ञात करते हैं। फिर प्राप्त अन्तर में दोनों तिथि के बीच पड़ने वाले जितने भी लीप वर्ष होते हैं उनकी संख्या जोड़ दी जाती है। फिर उनमें 7 से भाग दिया जाता है। यदि शेषफल शून्य आए, तो वही दिन होगा, यदि शेषफल अंकों में प्राप्त हो, तो पीछे के दिनों के बारे में पूछे जाने पर घटाकर अथवा बाद के दिनों के बारे में पूछे जाने पर जोड़कर अभीष्ट उत्तर ज्ञात करते हैं।

(c) मिश्रित समस्या पर आधारित प्रश्न

इसके अन्तर्गत पूछे जाने वाले प्रश्नों में सर्वप्रथम उपरोक्त दिए गए वर्ष अन्तराल के नियमों के आधार पर दिए गए वर्ष की तिथि का दिन ज्ञात करते हैं। फिर उस तिथि के दिन से पूछी गई अभीष्ट तिथि का दिन उपरोक्त दिए गए विभिन्न महीनों के नियमों के आधार पर ज्ञात करते हैं।

(d) मूल कैलेण्डर पर आधारित प्रश्न

इससे सम्बन्धित प्रश्नों को हल करने से पूर्व यह ध्यान रखना आवश्यक है कि किस शताब्दी में लीप वर्ष का 31 दिसम्बर, रविवार होगा, किसी शताब्दी लीप वर्ष के ठीक बाद का शताब्दी वर्ष को 31 दिसम्बर शुक्रवार, ठीक इसके बाद का शताब्दी वर्ष का 31 दिसम्बर बुधवार, फिर ठीक इसके बाद का शताब्दी वर्ष का 31 दिसम्बर सोमवार, फिर उसके बाद का शताब्दी वर्ष लीप वर्ष होगा। अत: 31 दिसम्बर रविवार होगा। इसी प्रकार अन्य शताब्दी लीप वर्षों के बीच का शताब्दी वर्ष का 31 दिसम्बर का दिन होगा। उपरोक्त तथ्यों के स्पष्टीकरण हेतु निम्न तथ्य व्यक्त किया गया है

31 दिसम्बर 1600 –» रविवार

31 दिसम्बर 1700 –» शुक्रवार

31 दिसम्बर 1800–» बुधवार

31 दिसम्बर 1900 –» सोमवार

31 दिसम्बर 2000) –» रविवारं

प्रकार 1

उदाहरण : यदि माह का 11वाँ दिन शनिवार है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा दिन माह में पाँच बार पड़ेगा ?

(a) मंगलवार    (b) रविवार    (C) शुक्रवार    (d) शनिवार

हल: (C) प्रश्नानुसार, यदि माह का 11वाँ दिन शनिवार है तो (11-7) = 4 तिथि को भी शनिवार होगा। इस तरह से 4 तिथि के पहले के सभी दिन अर्थात् शुक्रवार, बृहस्पतिवार तथा बुधवार माह में पाँच बार आएँगे।

प्रकार 2

उदाहरण : जतिन को ठीक से याद है कि उसकी माता का जन्मदिन 12 मार्च के बाद और 17 मार्च से पहले है जबकि उसकी बहन को ठीक से याद है कि उनकी माता का जन्मदिन 10 मार्च से बाद किन्तु 14 मार्च से पहले है। मार्च की किस तिथि को उनकी माता का जन्मदिन था ?

(a) 15   (b) 16   (c) 14   (d) निर्धारित नहीं किया जा सकता   (e) उपरोक्त से कोई नहीं

हल: (e) माता का जन्मदिन,

जतिन के अनुसार, —> 13, 14, 15, 16 मार्च

जतिन की बहन के अनुसार -> 11, 12, 13 मार्च

अतः माता का जन्मदिन 13 मार्च को था।







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