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दर्पण एवं जल प्रतिबिम्ब

दर्पण अर्थात् आइने में किसी वस्तु, वर्ण, संख्या या किसी आकृति के प्रतिबिम्ब को दर्पण-प्रतिबिम्ब कहते हैं।
उदाहरणस्वरूप जब हम अपने को दर्पण में देखते हैं तब दर्पण में हमारा दर्पण-प्रतिबिम्ब बनता है। अपने आप के दर्पण-प्रतिबिम्ब को ध्यान से देखने पर पाते हैं कि हमारा दायाँ भाग (शरीर का) प्रतिबिम्ब में बाई ओर तथा हमारा बायाँ भाग प्रतिबिम्ब में दाईं ओर होता है। यह सिर्फ हमारे साथ नहीं बल्कि सभी वस्तुओं के प्रतिबिम्ब के साथ होता है अर्थात् यह दर्पण प्रतिबिम्ब का गुण है कि दर्पण प्रतिबिम्ब में वस्तु, वर्ण, संख्या या किसी आकृति का बायाँ भाग दाई ओर तथा दायाँ भाग बायीं ओर दिखता है। इसी गुण को पार्शिवक उत्क्रमण कहते हैं।

जबकि जल में देखने पर वस्तु, वर्ण, संख्या या किसी आकृति का जो प्रतिबिम्ब बनता है वह जल-प्रतिबिम्ब कहलाता है। जल-प्रतिबिम्ब का यह गुण है कि जल प्रतिबिम्ब में वस्तु, वर्ण, संख्या या किसी आकृति का ऊपर का भाग नीचे तथा नीचे का भाग ऊपर दिखता है। जबकि दायाँ या बायाँ भाग अपरिवर्तित रहता है। जल प्रतिबिम्ब के इसी गुण को लम्बरूप उत्क्रमण कहा जाता है।



दर्पण-प्रतिबिम्ब
दर्पण-प्रतिबिम्ब से सम्बन्धित पूछे जाने वाले प्रश्न दो प्रकार के होते हैं। एक प्रकार के प्रश्न में यह दिया रहता है कि वस्तु के किस ओर (अर्थात् दाएँ या बाएँ या ऊपर या नीचे) दर्पण रखा गया है। फिर यह पूछा जाता है कि उस ओर दर्पण रखने पर वस्तु का प्रतिबिम्ब कैसा बनेगा। दूसरे प्रकार के प्रश्न में सिर्फ यह पूछा जाता है कि वस्तु का प्रतिबिम्ब कैसा बनेगा। इस स्थिति-दर्पण को वस्तु के सामने माना जाता है अर्थात् स्थिति दर्पण की दाई या बाई ओर होती है।

दर्पण के बाईं या दाईं तरफ होने पर प्रतिबिम्ब का गुण
(i) यदि वस्तु के दाई या बाईं ओर दर्पण हो, तो दर्पण-प्रतिबिम्ब में हमेशा वस्तु का ऊपरी तथा निचला भाग स्थिर रहता है।
(ii) वस्तु का दायाँ भाग दर्पण-प्रतिबिम्ब में बाई ओर तथा वस्तु का बायाँ भाग दर्पण-प्रतिबिम्ब में दाई ओर हो जाता है।
(iii) वस्तु का प्रतिबिम्ब बीच से ही बदलता है अर्थात् बीच से दाई ओर का भाग प्रतिबिम्ब में बाईं ओर तथा बीच से बाई ओर का भाग प्रतिबिम्ब में दाई ओर दिखेगा।

दर्पण के ऊपर या नीचे रहने पर प्रतिबिम्ब का गुण
(1) यदि वस्तु के ऊपर या नीचे दर्पण रखा हो, तो वस्तु का ऊपरी भाग दर्पण में नीचे तथा वस्तु का निचला भाग दर्पण में ऊपर होता है।
वस्तु :1 ↑ ⇒ प्रतिबिम्ब ↓ (दर्पण ऊपर या नीचे हो)

यदि प्रश्न में दर्पण वस्तु के सामने हो
इस स्थिति में अभ्यर्थी को दर्पण-प्रतिबिम्ब ज्ञात करने हेतु उस आकृति को पीछे के पृष्ठ से देखना चाहिए कि वह कैसा दिखता है। जैसा वस्तु पीछे वाले पृष्ठ से दिखेगा वैसा ही दर्पण प्रतिबिम्ब बनेगा यदि दर्पण वस्तु के सामने हो। अब हम कुछ वस्तुओं, वणों, संख्याओं तथा आकृतियों के दर्पण-प्रतिबिम्ब उदाहरणस्वरूप देखेंगे।

1. यदि दर्पण दाएँ या बाएँ हो

दर्पण एवं जल प्रतिबिम्ब

जल-प्रतिविम्ब
जल-प्रतिविम्ब में ठीक वही स्थिति होती है जो दर्पण के ऊपर या नीचे रखने पर होती है
(i) वस्तु का दायाँ तथा बायाँ भाग अपरिवर्तित रहता है।
(ii) वस्तु का ऊपरी भाग दर्पण में नीचे तथा वस्तु का निचला भाग दर्पण में ऊपर चला जाता है।

दर्पण एवं जल प्रतिबिम्ब

अब हम परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुरूप कुछ उदाहरण देखेंगे।

उदाहरण : नीचे दी गई आकृति को दर्पण में देखने पर उसका दर्पण- प्रतिबिम्ब कैसा बनेगा?

दर्पण एवं जल प्रतिबिम्ब

हल : (d) दर्पण AB की स्थिति से यह स्थिति है। दर्पण जब वस्तु के नीचे हो तो वस्तु के नीचे का भाग ऊपर तथा ऊपर का भाग नीचे हो जाता है। दाएँ तथा बाएँ भाग पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

दर्पण एवं जल प्रतिबिम्ब

हमने प्रश्न आकृति में एक काल्पनिक रेखा खींची है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितना (कौन-सा) भाग निचला है तथा कितना भाग ऊपरी है ताकि उलटने में सुविधा हो।

आकृति को उलटने पर उत्तर (d) की आकृति है। चूँकि दर्पण की स्थिति वस्तु के नीचे है अत: विकल्प (d) की आकृति ही वस्तु का जल-प्रतिबिम्ब भी होगी और दर्पण-प्रतिबिम्ब भी।







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