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दिशा परीक्षण Reasoning

दिशा एक मानक परिकल्पना है जिसके अनुसार सूर्य जिस ओर उदय होता है वह पूर्व दिशा कहलाती है तथा ठीक इसके विपरीत सूर्य जिस ओर अस्त होता है वह पश्चिम दिशा कहलाती है। यदि हम सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों, तो हमारे सामने की दिशा पूर्व, पीछे की दिशा पश्चिम तथा बाई ओर उत्तर एवं दाई ओर दक्षिण दिशा होगी।

दिशा परीक्षण रीजनिंगदिशा परीक्षण रीजनिंग

नोट-दक्षिणावर्त → दाएँ

वामावर्त → बाएँ



1. यहाँ प्रदर्शित आरेख के अनुसार यदि मध्य बिन्दु पर कोई व्यक्ति खड़ा हो, तो उसके ऊपर की ओर उत्तर, नीचे की ओर दक्षिण, दाई ओर पूर्व एवं बाई ओर पश्चिम दिशा होगी। इसी प्रकार हम उत्तर एवं पश्चिम के बीच की दिशा को उत्तर-पश्चिम, दक्षिण एवं पश्चिम के बीच की दिशा को दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण एवं पूर्व के बीच की दिशा को दक्षिण-पूर्व तथा उत्तर एवं पूर्व के बीच की दिशा को उत्तर-पूर्व मानते हैं।

2. यदि हम किसी दिशा की ओर मुख करके चल रहे हैं तथा किसी बिन्दु से हमें दाईं ओर मुड़ना हो, तो हमें अपनी दाईं ओर यानि घड़ी की सुई के चलने की दिशा में दक्षिणावर्त 90° का कोण बनाते हुए मुड़ना चाहिए, ठीक इसी प्रकार यदि बाईं ओर मुड़ना हो तो घड़ी की सुई के चलने की विपरीत दिशा में वामावर्त 90° का कोण बनाते हुए मुड़ना चाहिए।

3. सूर्योदय के समय परछाई बनने की दिशा निश्चित होती है। परछाई हमेशा सूर्य के आने की विपरीत दिशा में होती है।

4. दोपहर 12 बजे चूंकि सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं इसलिए उस समय कोई परछाई नहीं बनती है।

5. पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार किसी समकोण त्रिभुज में लम्ब के वर्ग तथा आधार के वर्ग का योग उसके कर्ण के वर्ग के बराबर होता है।

AB = आधार
BC – लम्ब
AC = कर्ण
AB2 + BC2 = ACया आधार2 + लम्ब2 = कर्ण2
दिशा परीक्षण रीजनिंग

 

 

दिशा परिवर्तन भिन्न-भिन्न दिशा परिवर्तन को हम निम्नलिखित आरेखो के माध्यम से भली-भाँति समझ सकते हैं

(i) दक्षिणावर्त परिवर्तन (Clockwise Rotation)

दिशा परीक्षण रीजनिंग

(ii) वामावर्त परिवर्तन (Anti-clockwise Rotation)

दिशा परीक्षण रीजनिंग

इसके अलावा दिशा परिवर्तन को एक दूसरे प्रकार से भी समझा जा सकता है

दिशा परीक्षण रीजनिंग

• यदि ‘1′ को उत्तर दिशा मानेगे तो ‘2’ को पूर्व, ‘3’ को दक्षिण तथा ‘4’ को पश्चिम दिशा मानेगे (सभी दिशाएँ 45° दक्षिणावर्त दिशा में घूम जाती हैं)।
• यदि ‘2’ को पश्चिम दिशा मानेगे तो ‘3’ को उत्तर, ‘4’ को पूर्व तथा ‘1’ को दक्षिण दिशा मानेगे (सभी दिशाएँ 135° वामावर्त दिशा में घूम जाती हैं)।

इसी प्रकार अन्य दिशाओं के निश्चित परिवर्तन के बारे में इस उपरोक्त आरेख से भली-भाँति समझ सकते हैं।

– दिशा परीक्षण के अन्तर्गत दो प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं

 

प्रकार 1

दिशा पर आधारित इसके अन्तर्गत किसी निश्चित बिन्दु या किसी निश्चित दिशा से अलग-अलग दूरियों एवं दिशाओं में भ्रमण करते हुए किसी निश्चित बिन्दु की प्रारम्भिक स्थान से दिशा पूछी जाती है।

उदाहरण : शहर A, शहर B से पूर्व की ओर है तथा शहर C से उत्तर की ओर है | शहर C, शहर B से किस दिशा में है ?
(a) उत्तर-पूर्व   (b) उत्तर-पश्चिम   (c) दक्षिण-पूर्व  (d) दक्षिण–पश्चिम  (e) इनमें से कोई नहीं
हल :

दिशा परीक्षण रीजनिंग

आरेख से स्पष्ट है कि शहर C, शहर B से दक्षिण-पूर्व दिशा में है।

 

प्रकार 2

दूरी पर आधारित इसके अंतर्गत किसी निश्चित बिंदु से अलग अलग दिशाओं की दूरियों का भ्रमण करते हुए किसी निश्चित बिंदु की प्रारंभिक स्थान से दूरी पूछी जाती है।

उदाहरण : जतिन 14 किमी पश्चिम की ओर जाता है और फिर 3 किमी दक्षिण की ओर जाता है। उसके बाद वह पुन: पूर्व की ओर 10 किमी जाता है। बताएँ कि वह अपने प्रारम्भिक स्थान से कितनी दूर है ?
(a) 12 किमी   (b) 15 किमी   (c) 10 किमी   (d) 5 किमी

हल : (d) जतिन के चलने का क्रम निम्नवत् है –

दिशा परीक्षण रीजनिंग

BE = CD = 3 किमी
DE = CB = 10 किमी
AB = 14 – 10 = 4 किमी

दिशा परीक्षण रीजनिंग
अत: जतिन अपने प्रारम्भिक स्थान से 5 किमी दूरी पर है






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