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महासागरीय जलधाराएँ General Knowledge

▬ एक निश्चित दिशा में बहुत अधिक दूरी तक महासागरीय जल की एक विशाल जल राशि के प्रवाह को महासागरीय जलधारा कहते हैं। यह धारा दो प्रकार की होती है-गर्म जलधारा और ठण्डी जलधारा।

गर्म जलधारा: निम्न अक्षांशों में ऊष्ण कटिबंधों से उच्च समशीतोषण और उपध्रुवीय कटिबंधों की ओर बहने वाली जल धाराओं को गर्म जलधारा कहते है। ये प्रायः भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर चलती है। इनके जल का तापमान मार्ग में आने वाले जल के तापमान से अधिक होता है। अतः ये धाराएँ जिन क्षेत्रों में चलती हैं वहाँ का तापमान बढ़ा देती है।



ठण्डी जलधारा: उच्च अक्षांशों से निम्न अक्षांशों की ओर बहने वाली जलधारा को ठण्डी जलधारा कहते हैं। ये प्रायः ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर चलती है। इनके जल के तापमान रास्ते आने वाले जल के तापमान से कम होता है। अतः ये धराए जिन क्षेत्रों में चलती है, वहाँ तापमान घटा देती है।

▬ उत्तरी गोलार्द्ध की जलधाराएं अपनी दायीं ओर तथा दक्षिण गोलार्द की जलधाराएँ अपनी बायीं ओर प्रवाहित होती है। यह कारिओलिस बल के प्रभाव से होता है।

▬ महासागरीय जलधाराओं के संचरण की सामान्य व्यवस्था का एकमात्र प्रसिद्ध अपवाद हिन्द महासागर के उत्तरी भाग में पाया जाता है। इस भाग में धाराओं के प्रवाह की दिशा मानसूनी पवन की दिशा के साथ बदल जाती है. गर्म जलधाराएं ठंडे सागरों की ओर और ठंडी जलधाराएँ गर्म सागर की ओर बहने लगती है।

▬ प्रशान्त महासागर की गर्म जल धाराएं:

1. उत्तरी विषुवत्रेखीय जलधारा

2. क्यूरोसियो की जलधारा

3. उत्तरी प्रशान्त जल प्रवाह

4. अलास्का की जलधारा

5. एलनिनो जलधारा

6. सुशीमा की जलधारा

7.दक्षिण विषुवतरेखीय जलधारा  

8. पूर्वी आस्ट्रेलिया की जलधारा

9.विपरीत विषुवरेखीय जलधारा

▬ प्रशान्त महासागर की ठंडी जल धाराएँ :

1. क्यूराइल विषुवतरेखीय जलधारा

2. हम्बोल्ट या पेरुवियन की जलधारा

3. कैलीफोर्निया की जलधारा

4.अंटार्कटिका की जलधारा

▬ अटलांटिक महासागर की गर्म जल पाराएँ :

1. उत्तरी विषुवत् रेखीय जलधारा

2. ब्राजील जलधारा

3. गल्फ स्ट्रीम जलधारा

4. विपरीत विषुवरेखीव गिनी जलधारा

5. फ्लोरिडा जलधारा

6.दरमिंजर की जलधारा

7. द० विषुवत्रेखीय जलधारा

▬ अटलांटिक महासागर की ठंडी जल पाराएं:

1. लेब्राडोर की जलधारा

2. पूर्वी ग्रीनलैंड की जलधारा

3. वेंगुएला की जलधारा

4. अंटार्कटिका की जलधारा

5. कनारी जलधारा

6. फॉकलैंड की जलधारा

▬ हिन्द महासागर की गर्म एवं स्थायी जल धाराएँ :

1. दक्षिण विषुवत् रेखीय जलधारा

2. अगुलहास की जलधारा

3. मोजाम्बिक की जलधारा

▬ हिन्द महासागर की ठंडी एवं स्थायी जल धाराएँ: पश्चिम आस्ट्रेलिया की जलधारा

नोट: हिन्द महासागर की ग्रीष्मकालीन मानसून की जलधारा गर्म एवं परिवर्तनशील जलधारा है एवं शीतकालीन मानसून प्रवाह ठण्डी एवं परिवर्तनशील जलधारा है।

सारगेसो सागर (Sargasso sea): उत्तरी अटलांटिक महासागर में 20° से 40° उत्तरी अक्षाशों तथा 35° से 75° पश्चिमी देशान्तरों के मध्य चारों ओर प्रवाहित होने वाली जलधाराओं के मध्य स्थित शान्त एवं स्थिर जल के क्षेत्र को सारंगैसो सागर के नाम से जाना जाता है। यह गल्फ स्टीम, कनारी तथा उत्तरी विषुवतीय धाराओं के चक्र बीच स्थित शांत जल क्षेत्र है। इसके तट पर मोटी समुद्री घास तैरती है। इस घास को पुर्तगाली भाषा में सारगैसम (Sargassum) कहते हैं, जिसके नाम पर ही इसका नाम सारंगैसो सागर रखा गया है। सारंगैसम जड़विहीन घास हैं। सारगैसो सागर क्षेत्रफल लगभग 11000 वर्ग किमी है।

▬ सारंगैसो सागर को सर्वप्रथम स्पेन के नाविकों ने देखा था।

▬ सारंगैसो सागर को महासागरीय मरुस्थल के रूप में पहचाना जाता है।

▬ न्यूफाउण्डलैंड के समीप ही गल्फ स्ट्रीम एवं लेब्राडोर जलधारा मिलती है न्यूफाउण्डलैंड पर ही समुद्री मछली पकड़ने का प्रसिद्ध स्थान ग्रैंड बैंक स्थित है

▬ गर्म एवं ठण्डी जलधारा जहाँ मिलती है वहाँ प्लेंकटन नामक घास मिलती है, जिससे उस स्थान पर मत्स्य उद्योग अत्यधिक विकसित हुआ है।

▬ जापान के निकट क्यूरो शिवो की गर्म धारा तथा ओय-शिवो की ठण्डी धारा के मिलने से वहाँ पर घना कुहासा छाया रहता है।

ज्वार-भाटा

ज्वार-भाटा (Tides): चन्द्रमा एवं सूर्य की आकर्षण शक्तियों के कारण सागरीय जल के ऊपर उठने तथा गिरने को ज्वार-भाटा कहते हैं। सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को ज्वार (Tide) तथा सागरीय जल को नीचे गिरकर पीछे लौटने (सागर की ओर) भाटा (Ebb) कहते हैं।

▬ चन्द्रमा का ज्वार-उत्पादक बल सूर्य की अपेक्षा दुगुना होता है, क्योंकि वह सूर्य की तुलना में पृथ्वी के अधिक निकट है।

▬ अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा, सूर्य एवं पृथ्वी एक सीध में में होते हैं। अतः इस दिन उच्च ज्वार उत्पन्न होता है।

▬ दोनों पक्षों की सप्तमी या अष्टमी को सूर्य और चन्द्रमा पृथ्वी के केन्द्र पर समकोण बनाते हैं, इस स्थिति में सूर्य और चन्द्रमा के आकर्षण बल एक-दूसरे को संतुलित करने के प्रयास में में प्रभावहीन हो जाते हैं। अतः इस दिन निम्न ज्वार उत्पन्न होता है।

▬ पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान पर प्रतिदिन 12 घंटे 26 मिनट के बाद ज्वार तथा ज्वार के 6 घंटे 13 मिनट बाद भाटा आता है।

▬ ज्वार प्रतिदिन दो बार आते हैं एक बार चन्द्रमा के आकर्षण से और दूसरी बार पृथ्वी के अपकेन्द्रीय बल के कारण।

▬ सामान्यतः ज्वार प्रतिदिन दो बार आता है किन्तु इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथचटर में ज्वार प्रतिदिन चार बार आते हैं। यहाँ दो बार ज्वार इंगलिश चैनल से होकर और दो बार उत्तरी सागर से होकर विभिन्न अंतरालों पर पहुंचते हैं।

▬ महासागरीय जल की सतह का औसत दैनिक तापान्तर नगण्य होता है (लगभग 1° C) I

▬ महासागरीय जल का उच्चतम वार्षिक तापक्रम अगस्त में एवं न्यूनतम वार्षिक तापक्रम फरवरी में अंकित किया जाता है।







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