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विलोम या विपरीतार्थक शब्द

सामान्य परिचय – किसी शब्द के अर्थ का विपरीत अर्थ देने वाले शब्द को विपरीतार्थक अथवा विलोम शब्द कहा जाता है ।
समानार्थी शब्दों की ही भाँति विपरीतार्थी शब्द होते है । अत: विपरीत अर्थ वाले शब्दों को लिखते समय यह ध्यान रखना चाहिए की शब्द जिस प्रकार का हो (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि) उसका विपरीतार्थी शब्द भी उसी कोटि का हो , अर्थात संज्ञा शब्द का विपरीतार्थी शब्द संज्ञा ही होना चाहिए , विशेषण के लिए विशेषण आदि।



कुछ विपरीतार्थक शब्दों की सूची

शब्द ———– प्रतिलोम

महात्मा ———- दुरात्मा

मुख्य ———— गौण

यथार्थ ———– कल्पित

राग ————- द्वेष

राजा ———— प्रजा

राम ————- रावण

लाभ ———— हानि

विरह ———— मिलन

अमृत ———– विष

विस्तार ———- संक्षेप

वृद्धि ———— ह्रास

शत्रु ————- मित्र

अंत ————- आदि

अंतरंग ———- बहिरंग

अंधकार ——— प्रकाश

अच्छा———- बुरा

अधिक ———- कम

आकाश ——— पाताल

आजाद ———- गुलाम

न्यून ————- अधिक

दरिद्र ———— धनी

ध्वंस ————- निर्माण

निद्रा ———— जागरण

निन्दा ———– स्तुति

नूतन ———— पुरातन

पक्का ———– कच्चा

आदर ———– अनादर

पालक ———- संहारक

जड़ ————- चेतन

देव ————– दानव

दिन ————– रात

थोक ————- खुदरा

त्याज्य ———— ग्राह्य

तीव्र ————– मन्द

जल ————– स्थल

छोटा ————- बड़ा

घृणा ————– प्रेम

गुप्त ————– प्रकट

गीला———— सूखा

गरीब ————- अमीर

खरा ————– खोटा

क्षुद्र ————— महान्

कृपण ———— दानी

प्राकृतिक ——— कृत्रिम

कड़वा ———— मीठा

कनिष्ठ ———— ज्येष्ठ

ऋजु ————– वक्र

एड़ी———— चोटी

उतार ———— चढ़ाव

उत्तम ———— अधम

आय ————- व्यय

आलोक ———- तिमिर

प्राचीन ———– अर्वाचीन

बाढ़———- सूखा

बच्चा———- बूढ़ा

उत्कर्ष ———- अपकर्ष

सजीव ———- निर्जीव

निष्काम ——– सकाम

आहार ———- निराहार

मान ———— अपमान

यश ———— अपयश

सुलभ ———- दुर्लभ

उन्मीलन ——- निमीलन

सुख ———— दुःख

खण्डन ——— मंडन

नास्तिक ——– आस्तिक

निरर्थक ——– सार्थक

निरामिष ——- सामिष

गुण ———— अवगुण

अनुराग ——– विराग

विपत्ति ——— सम्पत्ति

सज्जन ——— दुर्जन

निश्चेष्ट ———- सचेष्ट

उन्नति——– अवनति

विधवा——– सधवा

संकल्प ——– विकल्प

सदाचार ——- दुराचार

सुगम ———- दुर्गम

सुबोध ——— दुबोध

सौभाग्य ——- दुर्भाग्य

परतंत्र ——— स्वतंत्र

अनुकूल ——- प्रतिकूल

श्लील ——— अश्लील

संतोष ——— असंतोष

निन्ध ———- वन्द्य

मृदुल ——— रूक्ष

रसीला ——– नीरस

पाश्चात्य ——- पौरस्त्य

अधर्म ——– धर्म

अशुभ ——– शुभ

प्रतीची ——– प्राची

चपल ——— गम्भीर

तृषा——– तृप्ति

हिंसा——– अहिंसा

आरत ——– विरत

एक ———- अनेक

कृतज्ञ ——– कृतघ्न

सृष्टि ——— प्रलय

प्रसन्न ——– विषण

शान्त ——– अशान्त

योग्य ——— अयोग्य

कीर्ति ——– अपकीर्ति

खाद्य ——— अखाद्य

सुबह ——— शाम

स्वकीया —— परकीया

स्वर्ग ———- नरक

सत्कार ——- तिरस्कार

भारी ——— हल्का

मर्थ्य ———- अमर

महँगा——- सस्ता

शासक ——– सेवक

हर्ष ———— विषाद्

स्थूल ———- सूक्ष्म

सोना ———- जागना

सरल ———- कठिन

गुरु———- लघु

मनुज ———- दनुज

उचित ———- अनुचित

क्षणिक ——— शाश्वत

समष्टि –——— व्यष्टि

संकीर्ण ——— विस्तीर्ण

हास्य ———– रुदन

मूक ———— वाचाल

लौकिक ——– अलौकिक

शीत ———– उष्ण

विशिष्ट ——— साधारण

उपकार ——– अपकार

परलोक ——– इहलोक

शुक्ल ———- कृष्ण

शोषक ——— शोषित

शासक ——— शास्ति

शान्ति –——— क्रान्ति

संयोग ———- वियोग

सम्मुख ——— विमुख

साकार ——— निराकार

सगुण ———- निर्गुण

संधि ———– विच्छेद

भिज्ञ ———– अनभिज्ञ

उत्थान ——— पतन

अज्ञ ———— विज्ञ

साधारण ——- असाधारण

सकाम ——— निष्काम

प्रवृत्ति ———- निवृत्ति

ज्ञान ———– अज्ञान

घात ———– प्रतिघात

नश्वर ———– अनश्वर

आकर्षण ——- विकर्षण

अनुरक्त ——- विरक्त

इष्ट ———— अनिष्ट

नित्य ———- अनित्य

उत्तीर्ण ——— अनुत्तीर्ण

उपस्थित —— अनुपस्थित

पुरस्कार —— दण्ड

इच्छा ——— अनिच्छा

अर्थ ———- अनर्थ

आगत ——– अनागत

साक्षर ——– निरक्षर







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