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श्रुतिसम एवं समानार्थक शब्द

अर्थ में सामान प्रतीत होने वाले शब्दों का अंतर

सामान्य परिचय- हिंदी साहित्य में अनेक ऐसे शब्द पाए जाते हैं जो सामान्यता पर्यायवाची अर्थात समानार्थक प्रतीत होते हैं , परन्तु उन शब्दों के अर्थों में कुछ न कुछ अंतर अवश्य रहता हैं । ऐसे शब्दों का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी की आवश्यकता रहती है। इस प्रकार के शब्दों के कुछ उदहारण नीचे दिए गया हैं।



1. (A) अज्ञ – जिसको कुछ भी ज्ञान न हो।
(B) अनभिज्ञ – जिसको किसी विषय अथवा घटना विशेष की जानकारी न हो ।

 

 

2. (A) अज्ञात – जिसके विषय में जानकारी न हो।
(B) अज्ञेय – जो समझ में न आ सके।

 

 

3. (A) अमूल्य – जिस वस्तु का कोई मूल्य निश्चित न किया जा सके।
(B) बहुमूल्य–अधिक मूल्य वाली वस्तुएँ ।

 

 

4. (A) अस्त्र – फेंक कर प्रहार करने वाले हथियार ।
(B) शस्त्र  – हाथ में रखकर प्रहार करने वाले हथियार ।।

 

 

5. (A) आचार – साधारण बर्ताव, समाज के संदर्भ में । |
(B) व्यवहार – व्यक्ति विशेष के प्रति होने वाला बर्ताव ।

 

 

6. (A) आयु –  सम्पूर्ण जीवन ।।
(B) अवस्था – जन्म से वर्तमान समय तक की गणना ।

 

 

7.(A) प्रेम – समान अवस्था वालों के मध्य स्थापित प्रीति ।
(B) स्नेह – छोटों के प्रति बड़ों की प्रीति ।
(C) भक्ति – बड़ों के प्रति छोटों का पूज्य-बुद्धि मिश्रित प्रीति ।
(D) प्रणय – पति-पत्नी अथवा प्रेमी-प्रेयसी के बीच होने वाली प्रीति ।।
(E) श्रद्धा – अच्छे गुणों के प्रति निष्ठायुक्त प्रीति ।।

 

 

8.(A) भ्रान्ति – अयथार्थ ज्ञान को धारण कर लेना।
(B) शक – अयथार्थ ज्ञान के प्रति दुविधा—किसी वस्तु के सादृश्य के कारण अन्य वस्तु होना ।
(C) स्नेह – जब मन में विभिन्न विचार आते है तथा व्यक्ति किसी निष्कर्ष पर न पहुँच पाए।

 

 

9. (A) उद्योग – हर संभव प्रयत्न
(B) उधम – व्यवसाय ।।

 

 

10. (A) मुनि – धर्म और तत्व का विचार करने वाले – जो गौन रहें।
(B) ऋषि – ज्ञान, तत्व-ज्ञान आदि सम्बन्धी मंत्रों की व्याख्या करने वाले ।

 

 

11. (A) अर्पण – छोटों द्वारा बड़ों को कोई वर देना। |
(B) प्रदान – बड़ों द्वारा छोटो को कोई वस्तु देना।

 

 

12. (A) स्त्री – लिंग के आधार पर स्त्रीलिंग धारण करने वाली।
(B) महिला – किसी संभावित परिवार की स्त्री ।।
(C) पत्नी-अपनी वधू ।।

 

 

13. (A) सेवा – अपने से बड़ों की परिचर्या ।।
(B) सुश्रूषा – दीन, दुःखी तथा असहाय की परिचर्या ।
(C) परिचर्या – किसी की भी सेवा सुश्रूषा ।।

 

 

14. (A) अध्यक्ष – किसी संघ, संस्था, आयोग, परिषद् अथवा समुदाय का प्रधान ।।
(B) सभापति – किसी सभा, बैठक अथवा अधिवेशन का पीठासीन अधिकारी।

 

 

15. (A) अध्ययन – पठन-पाठन की सामान्य क्रिया।
(B) अनुशीलन – बारम्बार, अभ्यास, चिन्तन, मनन आदि–संक्षेप में गम्भीर अध्ययन ही अनुशीलन है ।

 

 

2. श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

शब्द —- अर्थ

शप्त — शाप पाया हुआ
सप्त — सात संख्या

 

नित — प्रतिदिन
नीत — लाया हुआ

 

शब — रात
शव — लाश

 

तरणी — नोका
तरणि — सूर्य

 

सर्व — सभी
शर्व — शंकर

 

दूत — संवादवाहक
द्युत — जुआ

 

शुल्क — फीस
शुक्ल — सफेद, श्वेत

 

द्विप — हाथी
द्वीप —टापू

 

सुकर — सहज
शुकर — सुअर

 

निहित — छिपा हुआ
निहत — मरा हुआ

 

नारी — स्त्री
नाड़ी — नब्ज

 

सूची — तालिका
सूचि — सुई

 

हरि — विष्णु
हरी — हरे रंग की

 

नीड़ — घोंसला
नीर — जल वर्ण

 

प्रसाद — कृपा
प्रासाद — महल

 

वर्ण — घाव
वर्ण — रंग

 

कलि — कलियुग
कली — अधखिला

 

तव —- तुम्हारा
तब —– उसके बाद

 

शाला —- घर
साला —- पत्नी का भाई

 

शान्त— चुप
सान्त — अन्त-सहित

 

विष — जहर
विस — कमल का डंठल

 

लक्ष — लाख
लक्ष्य — उद्देश्य

 

फुट — विषम, अकेला
फूट — वैर, मतभेद

 

बलि — बलिदान
बली — शक्तिशाली

 

वास — निवास
बांस — गन्ध

 

शकल — खण्ड, मुखाकृति
सकल — पूरा

 

शती — सौ का समूह
सती — पतिव्रता

 

शंकर — शिव
संकर — दोगला, जारज

 

दिन — दिवस
दीन — दरिद्र, गरीब

 

च्युत — गिरा हुआ
चूत — आम, चूतड़

 

पानी — जल
पाणी — हाथ

 

क्षत्र — क्षत्रिय-सम्बन्धी
छात्र — विद्यार्थी

 

जब — जिस समय
जव — जौ, वेग

 

पुर — नगर
पूर— आधिक्य

 

नशा — मद
निशा — रात

 

पवन — हवा
पावन — पवित्र

 

अंस — कंधा
अंश — हिस्सा

 

अंगना —- घर का आँगन
अंगना — स्त्री

 

इत्र — सुगंध का सत
इतर — दूसरा

 

उपल — पत्थर
उत्पल — कमल

 

उपकार — भलाई
अपकार — बुराई

 

कुल — वंश, सब
कूल — किनारा

 

अन्न— अनाज
अन्य — दूसरा

 

अनिल — हवा
अनल — आग

 

अम्बु — जल
अब — माता, आम

 

अथक — बिना थके हुए।
अकथ — जो कहा न जाय।

 

अध्ययन — पढ़ना
अध्यापन —- पढ़ाना

 

कंगाल — भिखारी
कंकाल — ठढरी

 

कृपण — कंजूस
कृपाण — कटार

 

कर्म — काम
क्रम — सिलसिला

 

अधम — नीच
अधर्म — पाप

 

कर — हाथ, टैक्स
कारा — जेल

 

कपि — बंदर
कपी — धिरनी

 

अलि — सखी
अली — भौरा

 

किला — गढ़
कीला — खूंटा

 

क्षत्र — क्षत्रिय
छत्र — छाता

 

आकर— खान
आकार — रूप

 

ग्रह — नक्षत्र
गृह — घर

 

चिर — पुराना
चीर — कपड़ा

 

द्रव — रस
द्रव्य — पदार्थ

 

तरंग — लहर
तुरंग — घोड़ा

 

निसान — झंडा
निशान — चिह्न

 

पानी — जल
पाणि —- हाथ

 

देव — देवता
दैव — भाग्य

 

पथ — रास्ता
पथ्य — आहार

 

दार — पत्नी, भार्या
द्वार — दरवाजा

 

दिन — दिवस
दीन — गरीब

 

प्रणाम — नमस्कार
प्रमाण — सबूत

 

प्रण — प्रतिज्ञा
प्राण — जान

 

नगर — शहर
नागर — चतुर व्यक्ति , शहरी







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