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सिक्ख एवं अंग्रेज General Knowledge

▬ सिक्ख सम्प्रदाय की स्थापना का श्रेय गरु नानक (प्रथम गुरु) को है। गुरु नानक के अनुयायी ही सिक्ख कहलाए। ये बादशाह बाबर एवं हुमायूँ के समकालीन थे।

▬ सन् 1496 ई० की कार्तिक पूर्णिमा को नानक को आध्यात्मिक पुनर्जीवन का आभास हुआ |

▬ गुरु नानक ने गुरु का लंगर नामक निःशुल्क सहभागी भोजनालय स्थापित किए।



▬ गुरु नानक ने अनेक स्थानों पर संगत (धर्मशाला) और पंगत (लंगर) स्थापित किए।

▬ संगत और पंगत ने गुरु नानक के अनुयायियों के लिए एक संस्था का कार्य किया जहाँ वें प्रतिदिन मिलते थे।

▬ गुरु नानक की सन् 1539 ई० में करतारपुर में मृत्यु हो गयी।

▬ गुरु अंगद (सन् 1539-52 ई०) सिक्खों के दूसरे गुरु थे। इनका प्रारम्भिक नाम लहना था।

▬ इन्होंने नानक द्वारा शुरू की गई लंगर-व्यवस्था को स्थायी बना दिया।

▬ गुरुमुखी लिपि का आरंभ गुरु अंगद ने किया।

▬ सिक्खों के तीसरे गुरु अमरदास (सन् 1552-74 ई०) थे।

▬ गुरु अमरदास ने हिन्दुओं से पृथक् होनेवाले कई कार्य किए। हिन्दुओं से अलग विवाह पद्धति लवन को प्रचलित किया।

▬ अकबर ने गुरु अमरदास से गोविन्दवाल जाकर भेंट की और गुरु-पुत्री बीबी भानी को कई गाँय दान में दिए ।  

▬ अमरदास ने 22 गद्दियों की स्थापना की और प्रत्येक पर एक महन्त की नियुक्ति की।

▬ बीबी के पति रामदास (सन् 1574-81 ई०) सिक्खों के चौथे गुरु हुए। अकबर ने बीबी भानी को 500 बीघा भूमि दी। गुरु रामदास ने इसी भूमि पर अमृतसर नामक जलाशय खुदवाया और अमृतसर नगर की स्थापना की। गुरु रामदास ने अपने तीसरे पुत्र अर्जुन को गुरु का पद सौंपा। इस प्रकार इन्होंने गुरु-पद को पैतृक बनाया।

▬ गुरु अर्जुन (सन् 1581-1605 ई०) सिक्खों के पाँचवें गुरु हुए। इन्होंने सिक्राणों के धार्मिक ग्रंथ आदिग्रंथ की रचना की। इसमें गुरु नानक की प्रेरणाप्रद प्रार्थनाएँ और गीत संकलित हैं।

▬ गुरु अर्जुन ने अमृतसर जलाशय के मध्य में हरमन्दर साहब का निर्माण कराया।

▬ राजकुमार खुसरो की सहायता करने के कारण जहाँगीर ने 1606 ई० में गुरु अर्जुन को मरवा दिया।

▬ सिक्खों के छठे गुरु हरगोविन्द (1606-1645 ई०) हुए। इनहोंने सिक्खों को सैन्य संगठन का रूप दिया तथा अकाल तख्त या ईश्वर के सिंहासन का निर्माण करवाया।

▬ ये दो तलवार बाँधकर गद्दी पर बैठते थे एवं दरबार में नगाड़ा बजाने की व्यवस्था की।

▬ इन्होंने अमृतसर की किलेबंदी की।

▬ सिक्खों के सातवें गुरु हरराय (1645-61 ई०) हुए। इन्होंने दाराशिकोह को मिलने आने पर आशीर्वाद दिया।

▬ सिक्खों के आठवें गरु हरकिशन (1661-64 ई०) हुए। इनकी मृत्यु चेचक से हो गयी। इन्हें दिल्ली जाकर गुरुपद के बारे में औरंगजेब को समझाना पड़ा था।

▬ सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर (1664-75 ई०) हुए । इस्लाम स्वीकार नहीं करने के कारण औरंगजेब ने इन्हें वर्तमान शीशगंज में गुरुद्वारा के निकट मरवा दिया।

▬ सिक्खों के दसवें एवं अंतिम गुरु, गुरु गोविन्द सिंह (1675-1708 ई०) हुए। इनका जन्म 1666 ई० में पटना में हुआ था।

▬ गुरु गोविन्द सिंह ने अपने को सच्चा बादशाह कहा। इन्होंने सिक्खों के लिए पांच ‘ककार’ अनिवार्य किया अर्थात् प्रत्येक सिक्ख को केश, कंघा, कृपाण, कच्छा और कड़ा रखने की अनुमति दी और सभी लोगों को अपने नाम के अन्त में ‘सिंह’ शब्द जोड़ने के लिए कहा।

▬ गुरु गोविन्द सिंह का निवास-स्थान आनंदपुर साहिब था एवं कार्यस्थली पाओता थी।

▬ इनके दो पुत्र फतह सिंह एवं जोरावर सिंह को सरहिंद के मुगल फौजदार वजीर खाँ ने दीवार में चिनवा दिया।

▬ 1699 ई० में वैशाखी के दिन गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की।

▬ पाहुल प्रणाली की शुरुआत गुरु गोविन्द सिंह ने की।

▬ गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्खों के धार्मिक ग्रंथ आदिग्रंथ को वर्तमान रूप दिया और कहा कि अब ‘गुरुवाणी’ सिक्ख सम्प्रदाय के गुरु का कार्य करेगी।

▬ गरुगोविन्द सिंह की हत्या 1708 ई० में नादेड़ नामक स्थान पर गुल खाँ नामक पठान ने कर दी।

बन्दा बहादुर : इनका जन्म 1670 ई० में पुंछ जिले के रजौली गाँव में हुआ था। इसके बचपन का नाम लक्ष्मणदास था। इनके पिता रामदेव भारद्वाज राजपूत थे।

▬ बन्दा का उद्देश्य पंजाब में एक सिक्ख राज्य स्थापित करने का था। इसके लिए इन्होंने लौहगढ़ को राजधानी बनाया। इन्होंने गुरु नानक एवं गुरु गोविन्द सिंह नाम के सिक्के चलवाए |

▬ बन्दा ने सरहिन्द के मुगल फौजदार वजीर खाँ की हत्या कर दी।

▬ मुगल बादशाह फर्रुखसियर के आदेश पर 1716 ई० में वन्दा सिंह को गुरुदासपुर नांगर नामक स्थान पर पकड़कर मौत के घाट उतार दिया गया।

▬ शाहदरा कल्लगढ़ी के नाम से विख्यात है जहाँ बन्दा ने हजारों मुगल सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

▬ बन्दा की मृत्यु के बाद सिक्ख कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गए थे. 1748 ई० में नवाब कर्पूर सिंह की पहल पर, सभी सिक्ख टुकड़ियों का दल खालसा में विलय हुआ।

▬ दल खालसा को जस्मा सिंह आहलूवालिया के नेतृत्व में रखा गया, जिसे बाद में बारह दलों में विभाजित किया गया। इसे मिसल कहा गया।

▬ मिसल अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ‘समान’ होता है।

रणजीत सिंह: रणजीत सिंह का जन्म गुजरांवाला में 2 नवम्बर, 1780 ई० को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के यहाँ हुआ था। इनके दादा चरतसिंह ने 12 मिसलों में सुकरचकिया मिसल को प्रमुख स्थान दिला दिया।

▬ 1798-99 ई० में रणजीत सिंह लाहौर का शासक बना। 25 अप्रैल, 1809 ई० को चार्ल्स मेटकाफ और महाराजा रणजीत सिंह के बीच अमृतसर की संधि हुई।

▬ रणजीत सिंह का राज्य चार सूचों में बँटा था-पेशावर, कश्मीर, मुल्तान एवं लाहौर ।

▬ महाराजा रणजीत सिंह का विदेश मंत्री फकीर अजीजुद्दीन एवं वित्त मंत्री दीनानाथ था।

▬ 7 जून, 1839 ई० में रणजीत सिंह की मृत्यु हो गयी।

▬ प्रथम ऑग्ल-सिक्ख युद्ध 1845-46 ई० में एवं द्वितीय ऑग्ल सिक्ख युद्ध 1849 ई० में हुआ।

▬ अंग्रेजों एवं सिक्खों के मध्य हुई संधि:

(i) लाहोर की संधि: 9 मार्च, 1846 ई०।

(ii) भैरोंवाल की संधि: 22 दिसम्बर, 1846 ई०। इस संधि के तहत राजा दलीप सिंह के संरक्षण हेतु अंग्रेजी सेना का प्रवास पंजाब में मान लिया गया।

▬ 20 अगस्त, 1847 ई० को महारानी जिदा को राजा दलीप सिंह से अलग कर 48,000 रु० वार्षिक पेंशन देकर शेखपुरा भेज दिया गया।

▬ द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के दौरान पहली लड़ाई चिलियानवाला की लड़ाई सिक्ख नेता शेर सिंह एवं अंग्रेज कमांडर गफ के मध्य लड़ी गयी। दूसरी लड़ाई गुजरात के चिनाब नदी के किनारे चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में अंग्रेजों ने 21 फरवरी, 1819 ई० को लड़ी। इस युद्ध में सिक्ख बुरी तरह पराजित हुए।

▬ लार्ड डलहौजी की 29 मार्च, 1849 ई० की घोषणा द्वारा संपूर्ण पंजाब का विलय अंग्रेजी राज्य में कर लिया गया। महाराजा दलीप सिंह को 50,000 पौंड की वार्षिक पेंशन दे दी गयी और उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। सिक्ख राज्य का प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर को महारानी विक्टोरिया को भेज दिया गया।







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